शनिवार, 19 अप्रैल, 2008

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय शिक्षा एवं शोध संस्थाओं की श्रेणी में खड़ा करना है- श्री अर्जुन सिंह

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय शिक्षा एवं शोध संस्थाओं की श्रेणी में खड़ा करना है- श्री अर्जुन सिंह

श्री अर्जुन सिंह ने आज अमरकंटक में राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी

मानव संसाधन विकास मंत्री श्री अर्जुन सिंह ने आज मध्य प्रदेश में अमरकंटक में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी । इस अवसर पर श्री अर्जुन सिंह ने कहा, न्न मैं इस अवसर पर यह भी कहना चाहूंगा कि यदि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय शोध और अध्ययन की संस्थाओं की श्रेणि में खड़ा करना है तो इसके लिए अत्यधिक परिश्रम व लग्न के साथ-साथ इस क्षेत्र के विकास और यहां के समुदाय के प्रति एक विशेष लगाव भी आवश्यक है और विश्वविद्यालय के मूल उद्देश्यों की सफल पूर्ति के लिए कई तरह की कुरबानियां भी देनी होंगी ।

देश में जनजातीय आबादी के लिए उच्च शिक्षा और शोध सुविधाओं के क्षेत्र में सुविधाएं जुटाने तथा इसे बढावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मध्य प्रदेश के अमरकंटक में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय नामक केन्द्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है । इससे जनजातीय क्षेत्र में विकास को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकेगी । अमरकंटक में मुख्यालय के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अनेक क्षेत्रीय केन्द्र और कैम्पस भी होंगे तथा इसके क्षेत्राधिकार को पूरे भारत में विस्तृत किया जाएगा।

मंत्री महोदय ने आज सुबह अमरकंटक में जवाहर नवोदय विद्यालय के प्रांगण में विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी । इस अवसर पर मध्य प्रदेश के वन एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री श्री विजय शाह और शहडौल से सांसद श्री दलपत सिंह परास्ते भी मौजूद थे । जाने-माने गांधीवादी और राष्ट्रीय सेवा योजना के संस्थापक डॉ. एस एन सुब्बाराव भी इस अवसर पर उपस्थित थे ।

इस अवसर पर श्री अर्जुन सिंह के उद्बोधन का मूल पाठ इस प्रकार है --

आज आप सभी के बीच नये भारत के निर्माताओं में से एक स्वर्गीय श्रीमती इन्दिरा गाँधी जी के नाम से जुड़े राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के अवसर पर उपस्थित होकर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता है। यह एक ऐतिहासिक अवसर है और राष्ट्र के लिए गौरव का दिन है। व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए मेरे सार्वजनिक जीवन का यह सबसे महत्वपूर्ण दिन है, जब आदरणीय इन्दिरा जी के नाम पर इस नये केन्द्रीय विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने का सौभाग्य मुझे मिला।

आज हम अमरकंटक की पावन भूमि में एक ऐसे ज्योतिस्तंभ को स्थापित करने जा रहे हैं, जो ज्ञान-विज्ञान की रोशनी से देश के जनजातीय क्षेत्रों में युवावर्ग को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नई दिशा देगा और जो दुनिया के किसी भी बेहतर से बेहतर शिक्षा केन्द्र से कम नहीं ऑंका जाएगा। इस विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार देशव्यापी होगा और इसे अन्य केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की तरह केन्द्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से वित्तीय सहायता दी जाएगी।

उच्च शिक्षा में जन-जातीय समुदाय की कम भागीदारी एक गम्भीर मुद्दा है। 11.6 के राष्ट्रीय सकल प्रवेश अनुपात की तुलना में जन-जातियों का अनुपात केवल 6.61 है। जन-जातियों में बालिकाओं का उच्च शिक्षा में अनुपात तो और भी कम (4.69) है। उच्च शिक्षा में जन-जातियों के युवावर्ग का दखल कम होने के कारण उनका शैक्षणिक और आर्थिक स्तर तुलनात्मक रूप से कम है और विकास की दौड़ में उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ नहीं उठा पाने से वे पिछड़ जाते हैं।

उत्तर-पूर्वी राज्यों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, झारखण्ड, उड़ीसा, आन्ध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में जन-जातियों की संख्या बहुतायत है। जहाँ प्रत्येक उत्तर-पूर्वी राज्य में कम-से-कम एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय उपलब्ध है, वहीं देश के अन्य जन-जातीय बाहुल्य इलाकों में कोई भी केन्द्रीय विश्वविद्यालय नहीं है। लेकिन यह केन्द्रीय विश्वविद्यालय, जो अमरकंटक में स्थापित किया जा रहा है, को इस बात का अधिकार रहेगा कि वह अन्य जन-जातीय बाहुल्य इलाकों में क्षेत्रीय कैम्पस खोल सकेगा।

इस विश्वविद्यालय का नाम एक ऐसे व्यक्तित्व पर रखा गया है, जो जनजातियों के विकास के लिए आजीवन संघर्ष करती रहीं। इन्दिरा जी सदैव जनजाति समुदायों के धैर्य, उनकी असीम क्षमता और कठिन परिस्थितियों में जुझने की ताकत से प्रभावित रहीं और कई अवसरों पर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे जनजातीय समुदाय से घुल-मिलकर कितना आनन्द अनुभव करती थीं। वह मानती थीं कि आदिवासी समुदाय में आर्थिक अभाव के बावजूद अपार उत्साह और उमंग है। वे जनजातीय संस्कृति को बचाए रखने और बढावा देने में भी आगे रहीं। इन्दिरा जी द्वारा सृजित 20 सूत्रीय सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रम में समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए और उन्हें शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए कई कदम उठाए थे। और जैसा आपको याद होगा कि 1980 के दशक में मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में जनजातियों को साहूकारों के कुचक्रों से परित्राण के लिए कानून बनाया गया। उनकी भूमि से उन्हें बेदखल करने वालों के विरुध्द कार्रवाई के कानून बने और इस तरह के कई अन्य सामाजिक आर्थिक न्याय संरचना के आधार बनाए। मध्य प्रदेश में तेंदुपत्ता व्यवसाय के सहकारीकरण का एक व्यापक कार्यक्रम हाथ में लिया गया था। उससे तमाम शोषण की शक्तियाँ नाराज हो गई थीं। परन्तु दृढता से उनसे मुकाबला किया गया था। आज अनेक वर्षों के बाद भी उस मूल अधिकार को वापिस नहीं लिया जा सका है। जहाँ इन्दिरा जी ने जनजातीय समुदायों से बहुत कुछ सीखा, वहीं देशभर के जनजातीय समुदायों ने स्वर्गीय इन्दिरा जी को भी अपना भरपूर स्नेह दिया। उन्होंने नेतृत्व क्षमता, कुशलता, कठिन मेहनत और अदम्य साहस पर अपनी आस्था रखी। इस राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय का नाम श्रीमती इन्दिरा गाँधी के नाम से जोड़कर भारत की संसद ने उस महान व्यक्तित्व के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है।

आमतौर पर विश्वविद्यालय की स्थापना बड़ें शहरों के आसपास किया जाना स्वाभाविक है। इस प्रकार के स्थल-चयन में आवागमन, सम्पर्क, आवासीय व्यवस्था, सामाजिक अधोसंरचना आदि की सुलभता आमतौर पर विश्वविद्यालयों को बड़े शहरों के नजदीक स्थापित करने के कारण होते हैं। परन्तु हमने यह सब जानते हुए भी इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना जनजातीय क्षेत्र में करने का निर्णय लिया। इस सोचे-समझे निर्णय के पीछे न केवल विकास की दौड़ में पिछड़े हुए लोगों को उच्च शिक्षा से जोड़ने का ध्येय रहा है, न केवल इस क्षेत्र के युवावर्ग के लिए उच्चतम स्तरीय शिक्षा एवं शोध के दरवाजे खोलने की चाह रही है, बल्कि साथ ही यह सुसंगत तर्क भी रहा है कि यदि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य उपलब्ध ज्ञान और विज्ञान की सम्भावना को बढाना और नए ज्ञान की खोज करना है, तो इसके लिए आवश्यक बौध्दिक क्षमता का उपयोग स्थानीय जनजाति के विकास से संबंधित विषय - जनजातीय भाषा, संस्कृति, कला, ऐतिहासिक विरासत और नैसर्गिक सम्पदा में शोध, खोज और उच्च अध्ययन के लिए किया जाना अनिवार्य है।

मैं इस अवसर पर यह भी कहना चाहूँगा कि यदि इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय शोध और अध्ययन की संस्थाओं की श्रेणी में खड़ा करना है तो इसके लिए अत्यधिक परिश्रम व लगन के साथ-साथ इस क्षेत्र के विकास और यहाँ के समुदाय के प्रति एक विशेष लगाव भी आवश्यक है और विश्वविद्यालय के मूल उद्देश्यों की सफल पूर्ति के लिए कई तरह की कुर्बानियाँ भी देनी होंगी।

जैसा मैंने पूर्व में भी कहा, इस विश्वविद्यालय की स्थापना जनजातीय क्षेत्र में किए जाने के साथ-साथ यह भी तय किया गया कि विश्वविद्यालय का मुख्यालय पवित्र नर्मदा और सोन नदियों के उद्गम स्थल, अमरकंटक की इस पावन-भूमि पर स्थापित किया जाए। इस विश्वविद्यालय की स्थापना से अब धार्मिक तीर्थ और दर्शनीय स्थल के अपनी पहचान के साथ-साथ, अमरकंटक अब ज्ञान सरोवर का भी उद्गम स्थल बन गया है। यहाँ से असीम ज्ञान प्रवाहित होगा और पूरे देश और पूरा विश्व उससे लाभान्वित होगा। मैं इस संदर्भ में कहना चाहूँगा कि हमारी इच्छा है कि इस विश्वविद्यालय का परिसर अमरकंटक की वादी में ही हो। मुझे मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी ने विश्वास दिलाया है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उपयुक्त मात्रा में जमीन उपलब्ध करेंगे और साथ ही वहाँ उपयुक्त बिजली और जल संसाधन की सुविधा भी उपलब्ध कराएँगे। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके सहयोग से इस परिसर की संरचना जल्दी ही शुरू की जाएगी।

इस विश्वविद्यालय को, जैसा कि आप जानते हैं क्षेत्रीय कैम्पस खोलने का अधिकार दिया गया है। हमने संसद में विश्वविद्यालय के कानून के बारे में हुई बहस के दौरान यह वायदा किया है कि प्रत्येक क्षेत्रीय कैम्पस उस क्षेत्र से जुड़े ऐतिहासिक महापुरुषों के नाम से स्थापित होंगे। इस प्रकार आने वाले समय में हम शहीद वीर नारायण सिंह, पराक्रमी गुंडाधूर, बिरसा मुण्डा जी आदि के नाम पर सम्बन्धित जनजातीय क्षेत्रों में विश्वविद्यालय के कैम्पस की स्थापना कर, उन क्षेत्रों का विकास करने के साथ-साथ इन महापुरुषों को अपनी सच्ची श्रध्दांजलि भी देंगे।

यह विश्वविद्यालय अन्य केन्द्रीय विश्वविद्यालयों, आदिवासी शोध संस्थानों और अन्य उच्च शिक्षण और शोध संस्थानों के साथ अपना जीवन्त सम्बन्ध और सम्पर्क स्थापित करेगा और देश और विश्व के हर कोने से उपलब्ध ज्ञान का अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति के लिए उपयोग करेगा। आजकल विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों की बात की जाती है, परन्तु मैं इस अवसर पर इस धारणा के प्रति भी सचेत करना चाहूँगा कि विश्वस्तरीय संस्थान केवल कैम्पस निर्माण की आधुनिक शैलियों, बहुमंजिली इमारतों, वातानुकूलित कक्षों और दिखावे के आडम्बर के आधार पर नहीं, बल्कि ज्ञान और विज्ञान के प्रति सच्ची श्रध्दा, अन्वेषण के लिए आवश्यक कौतूहल, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवीय मूल्यों के प्रति सम्मान और इन सबसे परे सादगीपूर्ण और गम्भीर आचरण से ही बन सकता है।

मैं आशा करता हूँ कि विश्वविद्यालय के सभी प्राधिकारियों का जल्द-से-जल्द चयन होगा, इस विश्वविद्यालय के कानून में यह विशेष व्यवस्था है कि विश्वविद्यालय की कोर्ट, कार्यकारी परिषद्, शैक्षणिक परिषद्, प्रशासन, अध्यापन और दाखिलों में जनजातीय समुदायों का विशेष और पर्याप्त प्रतिनिधित्व होगा।

वैसे तो 11वीं पंचवर्षीय योजना में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में केन्द्र सरकार द्वारा कई नए केन्द्रीय विश्वविद्यालय, विश्व स्तरीय संस्थान, आई.आई.टी., एन.आई.टी., विज्ञान और प्रबन्ध संस्थान खोले जाएँगे, परन्तु इन सबमें आज स्थापित होने वाले च्इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की एक अहम् भूमिका बनी रहेगी और इस विश्वविद्यालय को उसके उत्कृष्ट दर्जे पर बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय से जुड़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति का, मध्य प्रदेश और जहाँ कहीं भी विश्वविद्यालय का कैम्पस स्थापित होगा, उन राज्य सरकारों का, और स्थानीय समुदायों का बहुमूल्य योगदान मिलता रहेगा, इसी उम्मीद के साथ मैं आप सभी को धन्यवाद देता हूँ कि इस ऐतिहासिक घड़ी में आपने मुझे आमंत्रित किया। आपकी खुशहाली और विकास के लिए, इस क्षेत्र के जनजातियों के विकास के लिए, मैं अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। धन्यवाद !

जयहिन्द !

मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना का 27 अप्रैल को होगा शुभारंभ

मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना का 27 अप्रैल को होगा शुभारंभ

कार्यक्रम में बी.पी.एल.नीले राशन कार्ड धारी आमंत्रित

मुरैना 19 अप्रैल 08/ राज्य शासन द्वारा गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले  परिवारों के हित में बनाई गई '' मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना '' का शुभारंभ 27 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर किया जाएगा । यह बात आज कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने जिला पंचायत के सभागार में आयोजित बैठक में उपस्थित नोडल अधिकारियों को संबोधित करते हुए कही । इस अवसर पर जिला आपूर्ति अधिकारी श्री एस.दोहरे, तहसीलदार श्री बी.पी. श्रीवास्तव एवं नोडल अधिकारी उपस्थित थे ।

       कलेक्टर श्री त्रिपाठी ने नोडल अधिकारियों से कहा कि वे 27 अप्रेल को आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें । इस कार्यक्रम में बी.पी. एल. नीले राशन कार्डधारी भी विशेष रूप से आमंत्रित किए गए हैं । सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रारंभ की गई '' मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना'' में बी.पी.एल. के नीले राशन कार्डधारियों को प्रति माह 20 किलो खाद्यान्न गेंहू और चावल उपलब्ध कराया जाए । उन्हें इस योजना के तहत 3 रूपये किलो गेहूं एवं साढ़े 4 रूपये किलो की दर से चावल दिया जाएगा । इस अवसर पर जिला आपूर्ति अधिकारी श्री एस. दोहरे ने भी बैठक को सम्बोधित करते हुए उपस्थित नोडल अधिकारियों की समस्याओं का निराकरण किया ।

 

शुक्रवार, 18 अप्रैल, 2008

म.प्र. में बसों का किराया बढ़ेगा, बढ़ेगा टैक्‍स, प्रदेश के शेष 171 मार्गों के अराष्ट्रीयकरण का फैसला

म.प्र. में बसों का किराया बढ़ेगा, बढ़ेगा टैक्‍स, प्रदेश के शेष 171 मार्गों के अराष्ट्रीयकरण का फैसला

परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए त्रि-स्तरीय कर प्रणाली लागू होगी, परिवहन निगम की चल-अचल सम्पत्तियों का निराकरण, कलेक्टरों के नियंत्रण में होगा

मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में आज सम्पन्न हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश में परिवहन व्यवस्था की सुधार की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। आज सम्पन्न बैठक में प्रदेश के शेष 171 मार्गों के अराष्ट्रीयकरण का निर्णय लिया गया हैं। इससे पहले तीन वर्ष पूर्व फरवरी 2005 में राज्य शासन द्वारा मध्यप्रदेश सड़क परिवहन निगम बंद करने का सैध्दांतिक निर्णय लिया गया था। उक्त निर्णय के परिप्रेक्ष्य में अब तक कुल 681 राष्ट्रीयकृत मार्गों में से 510 मार्गों को राष्ट्रीयकृत योजनाओं से विलोपित किया जा चुका है तथा अब सिर्फ 171 राष्ट्रीयकृत मार्गों का अराष्ट्रीयकरण किया जाना शेष है। इसी सिलसिले में राज्य शासन द्वारा विगत 18 अक्टूबर 2007 को अधिसूचना जारी की जा चुकी हैं। इस अधिसूचना के विरूध्द उच्च न्यायालय जबलपुर में एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी। उपरोक्त याचिका में पारित अंतरिम आदेश दिनांक 14 नवम्बर 2007 के अनुसार मध्यप्रदेश सड़क परिवहन निगम के पक्ष में जारी परमिट याचिका के अंतिम निराकरण तक जीवित रखे जाएंगे।

त्रि-स्तरीय कर प्रणाली को मंजूरी

प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार लाने, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में वर्तमान में '', 'बी' तथा 'सी' श्रेणी के मार्गो पर लागू एक समान कर प्रणाली के स्थान पर त्रि-स्तरीय कर प्रणाली लागू करने का निर्णय भी आज मंत्रिपरिषद द्वारा लिया गया। इससे प्रदेश में बसों की संख्या एवं राजस्व आय दोनों में वृध्दि होगी।

वर्तमान में श्रेणी '', 'बी' तथा 'सी' के मार्ग पर संचालित बसों से प्रथम 100 कि.मी. पर 160 रूपए प्रतिसीट प्रतिमाह की दर से तथा अगले प्रत्येक 10 कि.मी. पर 10 रूपए की दर से कर लिया जाता हैं। अब नई त्रि-स्तरीय कर प्रणाली में '' श्रेणी के मार्गों अर्थात राष्ट्रीयकृत मार्ग पर संचालित बसों से प्रथम 100 कि.मी. पर 240 रूपए प्रतिसीट प्रतिमाह तथा अगले 10 कि.मी. पर 15 रूपए की दर से कर लिया जाना प्रस्तावित किया गया हैं। इसी तरह श्रेणी 'सी' के मार्ग अर्थात ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे दूरस्थ मार्ग जो किसी ग्राम को किसी नगर पंचायत, नगरपालिका अथवा नगर निगम से जोड़ते हैं तथा ऐसी नगर पंचायत, नगरपालिका तथा नगर निगम जहां बस एक फेरे में एक बार ही आती है, अब उन मार्गों पर संचालित बसों से नई कर प्रणाली में प्रथम 100 कि.मी. पर 120 रूपए प्रतिसीट प्रतिमाह तथा अगले 10 कि.मी. पर 5 रूपए की दर से कर लिया जाना प्रस्तावित हैं। इसी प्रकार ए और सी श्रेणी के मार्गों के अतिरिक्त शेष मार्ग जो 'बी' श्रेणी के मार्ग हैं वहां संचालित बसों से नई त्रि-स्तरीय कर प्रणाली में प्रथम 100 कि.मी. पर 160 रूपए प्रतिसीट प्रतिमाह तथा अगले प्रत्येक 10 कि.मी पर 10 रूपए की दर से कर लिया जाना प्रस्तावित हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अधिकाधिक बसों के संचालन के उद्देश्य से यह अनिर्वाय किया जायेगा कि बस संचालक यदि ग्रामीण क्षेत्र के साथ-साथ '' श्रेणी अथवा 'बी' श्रेणी के मार्ग पर भी बस संचालित करना चाहे तो कुल मार्ग में से दो तिहाई मार्ग ग्रामीण क्षेत्र का होना आवश्यक होगा। इसके अलावा जो बस संचालक आरक्षित बसों का संचालन करते हैं उन्हें आरक्षित बसों पर 120 रूपये प्रतिसीट प्रतिमाह की दर से कर देना होगा।

परिवहन निगम की चल-अचल सम्पत्ति के निराकरण की व्यवस्था

मंत्रिपरिषद द्वारा मध्यप्रदेश सड़क परिवहन निगम के परिसमापन के लिए शेष आवश्यक धनराशि की व्यवस्था करने का निर्णय भी लिया गया। इसके अलावा यह भी फैसला लिया गया है कि निगम की जप्त की गई चल-अचल सम्पत्तियों की सार्वजनिक नीलामी कर देनदारियों का भुगतान किया जावे। निगम की अचल सम्पत्तियां जिला परिवहन अधिकारियों द्वारा राज्य शासन के बकाया टैक्स के विरूध्द कुर्क की गई है। वर्तमान में बस स्टैण्ड के अतिरिक्त निगम के आधिपत्य में डिपो एवं कार्यशाला तथा आवासीय और गैर आवासीय भवन-परिसर प्रदेश के 30 जिलों में है। इन सम्पत्तियों के निराकरण के उद्देश्य से यह प्रस्तावित है कि जिला स्तर पर जिला परिवहन अधिकारी भू-राजस्व संहिता 1959 के अधीन प्राप्त तहसीलदारों के अधिकारों का प्रयोग कर इन सम्पत्तियों का यथाविधि निष्पादन करेंगे। इन सम्पत्तियों का मूल्यांकन निजी मूल्यांकक (evaluator) से विभाग को कराना होगा। जिला स्तर पर भी मूल्यांकन के लिए जिला कलेक्टर, लोक निर्माण विभाग और जिला रजिस्ट्रार से संयुक्त रिपोर्ट प्राप्त करेंगे। तत्पश्चात विभागीय अधिकारी यथाविधि संपत्ति का विक्रय करेंगे तथा जिला कलेक्टर से पुष्टि उपरान्त इसे अंतिम रूप देकर धनराशि शासकीय खजाने में जमा करेंगे।

 

20 अप्रैल से 22 अप्रैल तक 25 मतदान केन्द्रों पर होगी फोटोग्राफी

20 अप्रैल से 22 अप्रैल तक  25 मतदान केन्द्रों पर होगी फोटोग्राफी

मुरैना 17 अप्रैल // भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मुरैना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के फोटो परिचय पत्र से शेष बचे मतदाताओं की फोटोग्राफी 20 अप्रैल से 22 अप्रैल तक 25 मतदान केन्द्रों पर की जायेगी ।

       तहसीलदार श्री बी.पी. श्रीवास्तव के अनुसार 20 अप्रैल से 22 अप्रैल तक मुरैना विधान सभा क्षेत्र में प्रा. वि. गंजरामपुर में मतदान केन्द्र एक से 6 तक, मा.वि.जींगनी में 7 से 10 तक, कन्या प्रा.वि.डोंगरपुर में 136 से 138 तक, प्रा. शा.विचोली का पुरा में 139,140, 144, 145 तक आंगनवाड़ी भवन किशनपुर में 141 से 143 तक, प्रा. शा. लभन पुर में 146 से 150 तक के मतदताओं के फोटो परिचय पत्र बनाने के लिए फोटो खींचे जांयेगें 

 

मुरैना जिले में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की तिथियां निर्धारित

मुरैना जिले में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की तिथियां निर्धारित

मुरैना जनपद में 10 कन्यायें परिणय सूत्र में बधीं

मुरैना 17 अप्रेल 08/ मुख्य मंत्री कन्यादान योजना के अन्तर्गत मुरैना जिले में माह अप्रैल में जनपद पंचायतवार गरीब कन्याओं के विवाह का कार्यक्रम निर्धारित कर लिया गया है । जिसमें मुरैना जनपद में आज 10 गरीब कन्याओं के विवाह करायें गये, जिसमें 5 कन्याओं का विवाह ग्राम पंचायत खेरा मेवदा के ग्राम बरीकापुरा में और 5 कन्याओं का विवाह ग्राम पंचायत सिरमिती में सम्पन्न हुए ।

       कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने बताया कि जनपद पंचायत पहाडगढ़ के ग्राम कन्हार में 27 अप्रैल को और पहाडगढ़ में 18 अप्रैल को,  जनपद पंचायत अम्बाह में 19 अप्रैल को, 20 अप्रैल को सबलगढ़, 22 अप्रैल को पोरसा, 25 अप्रेल को जौरा और 26 अप्रैल को कैलारस में सामूहिक विवाह आयोजित होंगे।

सामूहिक विवाह कार्यक्रम की आयोजक संबंधित जनपद पंचायत होगी । गरीब कन्याओं की पारिवारिक स्थिति की जांच के संबंध में ग्रामीण क्षेत्र में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत तथा शहरी क्षेत्र में संबंधित क्षेत्र के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है । गैर बीपीएल आवेदकों के आवेदन पत्रों का परीक्षण कर उन्हें इस योजना के तहत नियमानुसार लाभान्वित किया जा सकता है । 

पंचायत मंत्री श्री रूस्तम सिंह 19 अप्रैल तक मुरैना रहेंगें

पंचायत मंत्री श्री रूस्तम सिंह 19 अप्रैल तक मुरैना रहेंगें 

मुरैना 17 अप्रैल 2008/ प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह 17 अप्रेल को भोपाल से शताब्दी एक्सप्रेस से मुरैना आयेंगे  और 18 और 19 अप्रैल 08 को स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे ।

 

पंचायत मंत्री श्री रूस्तम सिंह 19 अप्रैल तक मुरैना रहेंगें

पंचायत मंत्री श्री रूस्तम सिंह 19 अप्रैल तक मुरैना रहेंगें 

मुरैना 17 अप्रैल 2008/ प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रूस्तम सिंह 17 अप्रेल को भोपाल से शताब्दी एक्सप्रेस से मुरैना आयेंगे  और 18 और 19 अप्रैल 08 को स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे ।

 

पिछड़ी जन जाति के कल्याण हेतु विशेष कार्य योजना तैयार की जावे - संभागायुक्त श्री उपाध्याय

पिछड़ी जन जाति के कल्याण हेतु विशेष कार्य योजना तैयार की जावे - संभागायुक्त श्री उपाध्याय

मुरैना 17 अप्रैल 08/ विशेष पिछड़ी जन जाति वर्ग के लोगों को उनकी कब्जे वाली भूमि पर मालिकाना हक प्रदान किया जावेगा । इन वर्गों की बसाहटों को पूर्व विकसित करने के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश संभागायुक्त श्री विश्व मोहन उपाध्याय ने गत दिवस चम्बल भवन में उपस्थित अधिकारियों को दिये । इस अवसर पर अपर कलेक्टर मुरैना श्री उपेन्द्र नाथ शर्मा, अपर कलेक्टर भिण्ड श्री आर.पी. भारती, श्री आर.के. राय, अधीक्षण यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मुरैना, वन मण्डलाधिकारी श्री एस.सी. शर्मा, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री आर.एन. करैया, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मुरैना श्री ओ.पी. गुप्ता, जिला महिला बाल विकास अधिकारी भिण्ड, मुरैना श्री पी.के. राय, जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण मुरैना श्री के.पी. पाण्डेय, उपायुक्त चम्बल संभाग, मुरैना श्री आर.सी. मिश्रा सहित विभिन्न अधिकारी उपस्थित थे।

       आयुक्त श्री विश्वमोहन उपाध्याय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 13 वें वित्त आयोग के माध्यम से जन जातिय क्षेत्रों के विकास हेतु विशेष कार्य योजना तैयार की जा रही है । इस कार्य योजना के माध्यम से विशेष रूप से पिछड़ी जन जातियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किये जावेगें । उन्होंने कहा कि 13 वें वित्त आयोग के प्रस्तुत किये जाने वाले प्रस्तावों में जन जातिय क्षेत्रों के उन्नयन तथा सभी विशेष पिछड़ी जन जातियों के परिवारों को उनके कब्जे वाली भूमि पर भूमि स्वामी हक देकर भूमिधारी बनाना है, प्रत्येक विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार को आवास उपलब्ध कराना, 80 परिवारों से अधिक वाले विशेष पिछड़ी जन जाति गांव/ बसाहट में आंगनवाड़ी से विशेष पोषण आहार तथा आपात आहार कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जावेगा । उन्होंने कहा कि 50 परिवारों से अधिक वाले विशेष पिछड़ी जन जाति गांव / बसाहट में पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करना एवं 50 परिवारों से अधिक वाले विशेष विशेष पिछड़ी जनजाति गांव / बसाहट में आश्रम शाला की स्थापना तथा विभागीय कर्मचारियों के लिए आवासग्रहों का निर्माण करने हेतु कार्य योजना एवं व्यय की अनुमानित राशि का विभागवार आंकलन कर प्रस्ताव तैयार किया जाये । उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ी जनजातियों के मामले में श्योपुर जिला सर्वाधिक बाहुल्य क्षेत्र है तथा समस्याग्रस्त भी है । श्योपुर की पिछड़ी जन जातियों के सभी हितग्राही लाभान्वित हो कर अपना जीवन- यापन सही ढंग से कर सकें, इसके लिए प्रभावी कार्य योजना तैयार की जावे ।

 

गुरुवार, 17 अप्रैल, 2008

क्रिकेट के ये नये सिलसिले

क्रिकेट के ये नये सिलसिले

मनीष कुमार जोषी, सीताराम गेट के सामने, बीकानेर (राज) 9413769053

जी समूह के सुभाष चंद्रा ने जब एक ख्वाब  देखा तो क्रिकेट के ये नये सिलसिले शुरू हुए। क्रिकेट अपने परंपरागत रूप  से बाहर आई। क्रिकेट इस सिलसिले में जिस ने भी निगाह डाली उसे दूर दूर तक गुल ही गुल नजर आये। सुभाष चंद्रा ने क्रिकेट का एक अलग साम्राज्य स्थापित  कर उसका सम्राट बनने का सपना देखा तो कई और ख्वाब उससे जुड गयें। कपिल देव, ललित मोदी और शाहरूख खान के ख्वाब भी क्रिकेट के इस नये सिलसिले से जुड़ गये। सभी जुट गये गन्ने रूपी क्रिकेट को मषीन में डाल कर मिठास निचाड़ने की कोषिष में । हर एक ख्वाब क्रिकेट से जुड़ गया और क्रिकेट के नये सिलसिले शुरू हो गये। हर एक कासे क्रिकेट में दूर तक बहार ही बहार नजर आ रही है।

 

       सुभाष चंद्रा ने आईसीएल की शुरूआत कर अपने ख्वाब हो हकीकत में बदलने की कोषिष की तो कपिलदेव को भी एक बार फिर क्रिकैट में लहलहाती फसल नजर आने लगी। क्रिकेट की काल्पनिक नई सल्तनत में वो अपने आपको सुभाष चंद्रा जैसे सम्राट के प्रधानमंत्री के रूप में देखने लगे। सुभाष चंद्रा और कपिलदेव का ख्वाब हकीकत का रूप लेता उससे पहले ही बीसीसीआई के उपाध्यक्ष ललित मोदी का ख्वाब भी क्रिकेट नये सिलसिले से जुड़ गया। मोदी की निगाह सुभाष चंद्रा से भी आगे गई और उन्हे तो क्रिकेट में बहुत दूर तक बहार की लहलहाती फसल नजर आने लगी। मोदी ने जब इस फसल को काटने की योजना बनाई तो फिल्म स्टार शाहरूख खान के मन में भी क्रिकेट की इस लहलहाती फसल को काटने की चाहत हुई। शाहरूख खान की आंखे भी क्रिकेट के सपने देखने लगी। ललित मोदी और शाहरूख  का ख्वाब हकीकत में बदलता नजर आने लगा तो इस कड़ी में विजय माल्या और प्रीती जिंटा के ख्वाब भी इससे जुड़ गये। चाहतो और ख्वाबो के इसी सिलसिले की कड़ी है आईपीएल।

 

      एक ख्वाब से क्रिकेट का यह नया सिलसिला शुरू हुआ। नये क्रिकेट के हर मोड़ नया गुल खिला रहा है। एक ख्वाब से शुरू हुए इस सिलसिले से सैकड़ो ख्वाब जुड़ चुके है। जहां सुभाष चंद्रा का ख्वाब हकीकत पर टूटता नजर आ रहा है वहीं ललित मोदी का ख्वाब हकीकत में तब्दील नजर होता आ रहा है। क्रिकेट से मनोरंजन रूपी जैसे का ज्यूस निकालने के इस ख्वाब ने खेलो की दुनिया को हिलाकर रख दिया।  क्रिकेट के इस नये सिलसिले ने क्रिकेट की परिभाषा को बदल दिया है।

 

       ख्वाबो के इस सिलसिले में सभी को क्रिकेट माषूका की तरह नजर आ रही है। लेकिन वह तो बेचारी निरीह रूप  से खड़ी मूक दर्षक बनी हुई है। गन्ने जैसी मिठास भरी क्रिकेट को मषीन से बार बार निकालकर  उसके मिठास को निचोड़ने की पूरी कोषिष की जा रही है। अब गेंद और बल्ले का संघर्ष नहीं है। थिरकती सिने बालाओ के बीच चौको और छक्को का क्रिकेट हें। क्रिकेट का स्वयं  का ख्वाब टूट गया है। क्रिकेट में फुटबाल और हॉकी की प्रतिकृति बनती जा रही है। अब मैदाने में मैच बचाने के लिए संघर्ष नहीं होता है बल्कि क्रिकेट को पीटने का संघर्ष होता है । क्रिकेट पिटती जा रही हेै। क्रिकेट का समृध्द होने का ख्वाब टूट रहा है परन्तु क्रिकेट से जुड़े लोगो का ख्वाब बुलंदिया छु रहा है। दूर तक निगाह में खिले हुए गुल में हर कोई खो जाना चाहता है। क्रिकेट के इस सिलसिले के अभी कुछ ही मोड़ देखे है परन्तु आगे इस सिलसिले को कड़वे मोड़ देखने पड़ सकते है।

सीताराम गेट के सामने, बीकानेर (राज)

9413769053

 

अपराधी बाबूसिंह की गिरफतारी के लिये 15 हजार रूपये का इनाम घोषित

अपराधी बाबूसिंह की गिरफतारी के लिये 15 हजार रूपये का इनाम घोषित

ग्वालियर 16 अप्रैल 08 । चौरेला थाना बिठौली जनपद इटावा उत्तरप्रदेश निवासी अपराधी बाबूसिंह परिहार पुत्र सूखन सिंह परिहार की गिरफतारी के लिये 15 हजार रूपये का इनाम घोषित किया है । यह इनाम चंबल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री अरविन्द कुमार द्वारा घोषित किया गया है । अपराधी बाबूसिंह परिहार टी-31 गैंग का लीडर है । इस पर विभिन्न आपराधिक मामलों में तीन राज्यों के थानों मे विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज हैं । जिन थानों में प्रकरण दर्ज बताये गये हैं उनमें बिठौली, इटावा (उ.प्र.), रामपुर, जालौन (उ.प्र.), देवगढ़, मुरैना (म.प्र.), सिविल लाईन थाना मुरैना (म.प्रं.), राजाखेड़ा, धौलपुर (राजस्थान), कैलारस मुरैना, बागचीन मुरैना और अम्बाह थाना मुरैना (म.प्र.) हैं ।

       पुलिस महानिरीक्षक श्री अरविन्द कुमार ने जारी आदेश में कहा कि जो भी व्यक्ति इस अपराधी को बंदी बनाने या बंदी बनाने का विरोध किये जाने पर विधि संगत आवश्यक शक्तियों का प्रयोग कर बंदी बनायेगा या बंदी बनवाने के लिये सही सूचना देगा उस व्यक्ति को 15 हजार रूपये का इनाम दिया जायेगा । इनाम (पुरस्कार) वितरण में पुलिस महानिरीक्षक चंबल रेंज का निर्णय अंतिम होगा ।

 

प्रभारी मंत्री द्वारा ग्राम नंदपुरा में 24 लाख रूपये की लागत की नल जल योजना का भूमि पूजन

प्रभारी मंत्री द्वारा ग्राम नंदपुरा में 24 लाख रूपये की लागत की नल जल योजना का भूमि पूजन

मुरैना 16 अप्रेल 08/ प्रदेश के ग्रामोद्योग, उद्यानिकी, एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने आज जौरा विकास खंड के ग्राम नन्दपुरा में 24 लाख 8 हजार रूपये की लागत से बनाइ जाने वाली नल जल योजना का भूमि पूजन किया । इस अवसर पर क्षेत्रीय सांसद अशोक अर्गल, एम.पी.एग्रो इण्डस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री मुंशीलाल सहित स्थानीय जन प्रतिनिधि व ग्रामीणजन उपस्थित थे

              प्रभारी मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि इन नल जल योजना के निर्माण से नन्दपुरा वासियों की वर्षो की मांग पूर्ण हो सकेगी । उन्होंने कहा कि नल जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण का दायित्व ग्रामीणों का है , इसके लिए ग्राम में ग्राम स्वच्छता समिति का गठन किया जावेगा । उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति हेतु कृत संकल्पित है । इसके लिए पर्याप्त मात्रा में धनराशि भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सेवा को मुहैया करा दी गई है ।

              उन्होंने कहा कि ग्राम न