बुधवार, 30 मई, 2007

करोड़ों के गबन और गोलमाल की खुल सकती है पोल,बाबू और अफसर छुटटी लेकर फरार

सूचना का अधिकार के आवेदन पर शिक्षा विभाग में हड़कम्प

करोड़ों के गबन और गोलमाल की खुल सकती है पोल,बाबू और अफसर छुटटी लेकर फरार

पठठे मलाई मार रहे थे,सूचना का अधिकार ने की हर हर गंगे

विशेष रिपोर्ट- संजय गुप्‍ता (मांडिल) जिला संवाददाता मुरैना

मुरैना 24 मई 2007 ! भारत सरकार के सूचना का अधिकार अधिनियम को ठण्डे बस्ते में फेंक कर बेतकल्लुफ हो भ्रष्टाचार की भ्रष्टोत्री में डुबकियां लगा रहे शिक्षा महकमे में सूचना का अधिकार के तहत हाल ही में आये एक आवेदन ने पसीने छुड़ा दिये हैं !

ज्ञात हुआ है कि मुरैना के एक समाजसेवी पत्रकार अशोक शर्मा जो कि श्रमजीवी पत्रकार संघ के मुरैना जिलाध्यक्ष रहे हैं, ने एक आवेदन हाल ही में भारत सरकार के सूचना का अधिकार अधिनियम में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय मुरैना को प्रस्तुत किया है, इसमें श्री शर्मा ने जिला पर्यावरण क्लब योजना के बारे में और रेडक्रास के बारे में चन्द जानकारीयां मांगीं हैं ! बताया जाता है कि उनके इस आवेदन में मांगी गयी सूचनाओं को बारीकी से देखने पर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अफसरों और बाबुओं के पसीने छूट गये !

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2001 से स्कूलों में पर्यावरण क्लब गठन करने के लिये एक नेशनल ग्रीन कोर नामक योजना चलाई जा रही है जिसमें सरकार द्वारा प्रतिवर्ष एक लाख रू का अनुदान सहायता भी इन पर्यावरण क्लबों को दी जाती है ! वर्ष 2001 और 2002 में मुरैना जिला में धुंआधार चले और काफी मशहूर हुये ये सभी 160 पर्यावरण क्लब जिले से रातों रात गायब हो गये ! हर पन्द्रह दिन के अन्तराल पर होने वाली इसकी समिति की बैठकें भी मई 2002 के पश्चात नहीं हुयी !

इसके बाद तगड़ा फर्जीवाड़ा और गबन जिले में हुआ ! सूत्र बताते हैं कि जिला शिक्षा विभाग मुरैना ने एक फर्जी आदेश जारी कर मुरैना जिला के सभी प्रायमरी, मिडिल एवं हाईस्कूलों व इण्टरमीडियेट के छात्र छात्राओं से पर्यावरण शुल्क के नाम से 5 से 10 रू वसूलना शुरू कर दिये ! मजे की बात यह है कि इस प्रकार का शुल्क वसूलने का प्रावधान न तो योजना में ही था और न म.प्र. शिक्षा संहिता में ही ऐसा कोई मद निर्धारण है ! न कभी कोई शासकीय परिपत्र या आदेश कभी ऐसा जारी हुआ ! इसके बावजूद जिले भर के छात्रों से यह शुल्क दनादन हर साल आज दिनांक तक वसूला गया ! केवल वसूला ही नहीं गया बल्कि इस शुल्क को भरने के लिये स्कूल वालों और छात्रों को डराया धमकाया गया, उनके परीक्षा फार्म भरवाने और छात्रों की परीक्षायें करवाने से इन्कार कराने से लेकर उनके स्कूलों की मान्यतायें समाप्त करने, मान्यता का पुनर्नवीकरण न करने जैसी धमकीयां के आदेश व नोटिस लिखित में जारी किये गये !

इस प्रकार फर्जी शुल्क वसूली जिला शिक्षा अधिकारी मुरैना और कार्यालयीन बाबुओं ने मिलकर 7 साल तक की, ज्ञातव्य है कि जिला मुरैना में लगभग  3000 स्‍कूल हैं जिसमें औसतन 10-15 लाख छात्र छात्रायें अध्‍ययनरत हैं , इस प्रकार इस सरकारी फर्जीवाड़े में लगभग करोड़ों रूपया बिना किसी मद के और बिना किसी प्रावधान के जबरन वसूला गया । जिसमें कई आला अफसर और कुछ आई ए एस स्‍तर तक के अधिकारी शामिल हैं । यह भी सनद रहे कि इस योजना में इस प्रकार का शुल्‍क समूचे भारतवर्ष में कहीं भी नहीं वसूला जाता, केवल देश भर में मुरैना जिला ही एकमात्र ऐसा जिला है , जहॉं इसकी वसूली की जा रही है, और शिक्षा विभाग इसे कहॉं खर्च कर रहा है, खुद शिक्षा विभाग को नहीं पता ।

जो आवेदन शिक्षा विभाग में सूचना का अधिकार के तहत आया है, उसमें पूछने वाले ने अपने सवालात कुछ इस प्रकार से पूछे हैं कि , भ्रष्‍ट शायद ही बच कर निकल पायें  कई बाबू और अधिकारी इस आवेदन के आने के बाद छुटटी लेकर भाग गये हैं , इस आवेदन में पूछे गये प्रश्‍न इस प्रकार हैं -     

1-                   भारत सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय की ''पर्यावरण क्लब'' योजना जो कि ''नेशनल ग्रीन कोर'' के तहत एप्को भोपाल के मार्फत शिक्षा विभाग द्वारा संचालित की जा रही है, की शासन द्वारा निर्धारित संचालन प्रक्रिया एवं नियमावली की प्रति चाहिये, एवं इस योजना के तहत कुल कितने पर्यावरण क्लब मुरैना जिला में संचालित हैं सूची चाहिये !

2-                  उपरोक्त बिन्दु क्रमांक 1 में वर्णित योजना के तहत गठित व घोषित ''जिला स्तरीय समिति'' की समिति गठन दिनांक से आज दिनांक तक कुल कितनी बैठकें व कब कब हुयीं हैं, मय दिनांक मय प्रस्ताव विवरण मय सदस्यगण हस्ताक्षरित विवरण चाहिये, तथा यह भी कि इस समिति की बैठक सम्बन्धी नियम क्या हैं, मय आदेश की प्रति चाहिये !

3-                  उपरोक्त बिन्दु क्रमांक 1 में वर्णित योजना के तहत मुरैना जिला में संचालित पर्यावरण क्लबों में छात्र-छात्राओं एवं सदस्यों से शुल्क लिये जाने के क्या प्रावधान हैं, शासनादेश के प्रति चाहिये, तथा वर्ष 2001 से आज दिनांक तक कुल कितनी राशि इस शुल्क व प्रभार के रूप में प्राप्त की गयी, वर्षवार व संस्थावार विवरण चाहिये !

4-                  उपरोक्त क्रमांक 3 में वर्णित वसूली गयी शुल्क राशि किस मद में व कब कब किस खाते में आवक हुयी और किस खाते में किस बैंक में किस किस दिनांक को कितनी कितनी जमा की गयी, मय बैंक खाता क्रमांक, मय अकाउण्ट डिटेल्स चाहिये !

5-                  उपरोक्त बिन्दु क्रमांक 3 में वर्णित वसूली गयी राशि के व्ययन सम्बन्धी क्या शासकीय नियम व आदेश हैं, आदेश व नियमों की मूल प्रति चाहिये, तथा यह कि वर्षवार, एवं मदवार व्यय विवरण चाहिये, यदि व्यय सम्बन्धी भौतिक सत्यापन करना है तो कृपया बतायें कि यह कैसे किया जा सकता है !

6-                  उपरोक्त बिन्दु क्रमांक 1 में वर्णित योजना के तहत कुल कितनी राशि वर्ष 2001 से आज दिनांक तक शासकीय सहायता या अनुदान के रूप में मुरैना जिला को प्राप्त हुयी व इसका व्ययन कब कब व किस किस प्रकार कहाँ कहाँ किया गया ? वर्षवार, डिटेल्स चाहिये !

7-                  रेडक्रास योजना के तहत विगत दस वर्षों के दौरान कुल कितनी राशि कहाँ कहाँ से कब कब कितनी आपको प्राप्त हुयी सूचीबध्द रूप में सी.डी. चाहिये और यह राशि किन किन मदों में कब कब व कैसे कैसे च्यय की गयी !  

 

 

 

बिजली कम्पनी के बाद अब बी.एस.एन.एल. भी त्रस्त हुआ नगरपालिका से

बिजली कम्पनी के बाद अब बी.एस.एन.एल. भी त्रस्त हुआ नगरपालिका से

शहर की बिजली डम्प होने के बाद शहर के 600 से अधिक टेलीफोन ठप्प

सारी दुनिया से सम्पर्क कट गया आधे शहर का, इण्टरनेट सेवायें बन्द हुयीं

नरेन्द्र सिंह तोमर 'आनन्द'

मुरैना 30 मई 2007 ! अब इसे किस्मत की मार कहा जाये या प्रशासनिक चाल फरेबी, जहाँ चम्बल अंचल का जिला अन्धाधुन्ध अघोषित धुआंधार रात और दिन की बिजली कटौती से त्रस्त और परेशान है वहीं जिस आधे शहर की बिजली नहीं जाती थी उस पर कुदरत का या कहिये कि नगरपालिका का कहर मुसीबत बन कर टूट पड़ा और चकाचक बिजली से मजे मार रहे आधे वी.आई.पी बनाम बीजेपी मोहल्लों में भी नगरपालिका की धींगामस्ती और लापरवाही के चलते ब्लैक आउट पूरे तीन दिनों के लिये छा गया !

हुआ यूं कि मुरैना की नगर पालिका भ्रष्टाचार और गैर प्लानिंग व गैर तकनीकी कुशलता व विशेषज्ञ हीनता के चलते रोजाना ही शहर की सड़के खुदवाती रहती है ! गोया आलम ये है कि शहर की कोई गली या मोहल्ला ऐसा नहीं मिलेगा जिसमें साल में सत्रह बार सड़के न खुदीं हों ! और तो और मुरैना शहर की मुख्य सड़क जिसे एम.एस. रोड कहकर पुकारा जाता है , और रिकाण्डों द्वारा एक समय भारी भरकम रकम लेकर इसे बनाया साल भर खुदती रहने से इसकी ऐसी दुर्दशा हुयी है कि यह अब सड़क नहीं किसी गांव की तीस साल पहले वाली गली नजर आती है ! यह वही सड़क है जो राष्टीय राजमार्ग क्रमांक 3 को क्रास करती है, अंग्रेजी हुकूमत द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक सड़क का आलम ए दुर्दशा यह हो चुकी है कि इसे चम्बल के सीने का बदनुमा धब्बा कहें तो बेहतर है !

इस सड़क के भी कभी सुनहरे दिन थे, अरविन्द जोशी से लेकर राधेश्याम जुलानियां तक कई कलेक्टरों का इस सड़क से गहरा नाता बना रहा है, और यही सड़क उन्हें मशहूरियत दिलाकर नामवर बना गई और आज हालत कुछ ऐसी है कि साल भर रोजाना इसकी खुदाई कहीं न कहीं चलती रहती है !

नगरपालिका के पास कुशल तकनीकी विशेषज्ञ नहीं हैं और नकलची तथा दिमाग से पैदल तथाकथित विशेषज्ञों की फौज भरी पड़ी है यह तो सर्वज्ञात और सामान्य बात थी, चाहे इसकी वजह जुगाड़ लगाकर पैसा देकर या राजनीतिक या प्रशासनिक गुन्ताड़े लगा कर अपात्रों द्वारा नौकरी हथियाना रहा हो चाहे सोर्स सिप्‍पे के कारण अपात्रों को भर्ती करना हो ! यह तो तय है कि शहर का हुलिया चौपट हो चुका है !

नगरपालिका पिछले तीस साल से शहर का सौन्दर्यीकरण कार्यक्रम चला रही है ! शहर का सौन्दर्यीकरण तो खैर न होना था न हुआ और न हो सकेगा ! हाँ सौन्दर्यीकरण के नाम पर शहर को उजाड़ कर वीरान और बेतरतीब जरूर कर दिया ! दरअसल कोई स्थायी प्लानिंग न होने और कुशलता व विशेषज्ञता के अभाव वश जहाँ हर साल एक नई प्लानिंग नगरपालिका लागू करती है, फिर पुरानी को मिटा कर फिर एक नई रीति से शहर की दोबारा तोड़ फोड़ शुरू कर दी जाती है !

पिछले 20 साल में हुयी शहर की तोड़ फोड़ और खुदाई का आकलन किया जाये तो शहर जहाँ आर्थिक तौर पर नुकसान उठा कर करोड़ों रूपयों का खामियाजा उठा चुका है वहीं शहर का दिहाड़ी व्यवसाय लगभग समाप्तप्राय हो चुका है वहीं व्यापारी और रहवासी भी करोड़ों का व्यक्तिगत नुकसान अलग से झेल चुके हैं !

जहाँ शहर के निर्माण कार्य रोज बनाओ रोज मिटाओ की नीति के तहत चलकर भ्रष्टों के लिये कामधेनु बन गये हैं वहीं मरम्मत और तथाकथित सौन्दर्यीकरण बनाम उजाड़ीकरण का धन्धा भी भ्रष्टाचार में आकण्ठ लिप्त नगरपालिका के लिये दोनों हाथ दुहने जैसा बन गया है !

मैंने कई प्रशासनिक और नगरपालिका अधिकारीयों के कामकाज को गहराई से अध्ययन किया, मुझे लगता है कि शहर की बर्बादी और भ्रष्टों के पालन का स्त्रोत बनकर मात्र मुरैना नगरपालिका रह गयी है !

मजे की बात यह है कि जहाँ सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 के तहत सम्पूर्ण अभिलेख अब तक नगरपालिका का इण्टरनेट पर आ जाना चाहिये था वहाँ अभी तक नगरपालिका की 17 बिन्दुओं के तहत भी जानकारी अभी तक इण्टरनेट पर उपलब्ध नहीं हैं ! यदि कोई सूचना का अधिकार के तहत नगरपालिका से जानकारी मांगे तो जिस प्रकार के उल्टे सीधे पत्र आपको मिलेंगे आपका सिर चकरा कर रह जायेगा मसलन 'आपके द्वारा चाही जानकारी अधिक होने से आपको नहीं दी जा सकती' या 'आपके द्वारा चाही जानकारी इस कार्यालय में उपलब्ध नहीं है अत: आपको नहीं दी जा सकती' मेरे पास कुछ मजेदार ऐसे उत्तर रखे हैं, जो कानून का पायजामा बना कर नगरपालिका ने दिये हैं ! गोया कुल मिला कर कानून क्या है नियम क्या है यह सब नगरपालिका से परे की बातें हैं !

अब और एक नया तमाशा भी सुनिये - आपको यह जानकर हैरत होगी कि नगरपालिका मुरैना में फोन नहीं है, यानि आप टेलीफोन से अपनी शिकायत नगरपालिका में आमद कराना चाहें तो वहाँ न फोन है, न ई मेल और न फैक्स ! गोया झक मार कर सी.एम.ओ. के मोबाइल पर फोन लगाओ, उसके नम्बर पर फोन लगाओ तो आपका नम्बर नया हुआ तो वह उठायेगा ही नहीं !

शहर में नगरपालिका के लिये क्या शिकायत समाधान की क्या प्रणाली है, इसकी पड़ताल जब हमने की तो ये सब राजफाश हुये ! आज जहाँ जमाना नये युग में प्रवेश कर रहा है और सूचना प्रौद्योगिकी के क्रान्तिजगत में समाविष्ट हो रहा है वहाँ मुरैना की नगरपालिका आज भी बैलगाड़ी की सवारी कर रही है ! गोया सीधे दिये जाने वाले लिखित आवेदनों की हालत ये है कि मैंने उन पर कभी कोई कार्यवाही होते नहीं देखी, मेरे पास कई आवेदनों की पावतीयां मौजूद है जिन पर कभी नगरपालिका न कोई कार्यवाही नहीं की !

अभी एक तथाकथित सीवर लाइन के निर्माण के लिये शहर के नाला नंबर दो और यत्र तत्र सर्वत्र खुदायी चल रही है, अब यह खुदायी कैसी है, पहले बिजली के खम्बे मय टान्सफार्मरों के नाले में गिर कर डूब गये फिर खम्बे गिरे बिजली गुल हुयी, ब्लैकआउट हुआ उसके बाद भारत संचार निगम लिमिटेड की टेलीफोन लाइन्स केबलें थोक के भाव काट दीं ! अंजाम ये हुआ कि उधर शहर की बिजली गुल इधर संचार सम्पर्क समाप्त, लो बेटा करो क्या करोगे ! इण्टरनेट, टेलीनेट,मीडिया, बिजली सब बन्द ! जै राम जी की ! जय हो प्रभु ! गोया मुरैना शहर में नहीं किसी जंगल में आ बसे हों ! ऐसा दुर्लभ नजारा बीच शहर का देखना चाहते हैं , तो प्यारे आ जाओ मुरैना ! इससे बढ़िया होली डे प्लेस या पिकनिक स्पॉट पूरे हिन्दुस्तान में कहीं नहीं मिलेगा ! गोया हमने अपने शहर का सौन्दर्यीकरण कुछ ऐसा किया है कि सत्रहवीं और अठारहवीं सदी के जंगली गांव में इसे बदल दिया है ! अब जब सारी दुनियां सूचना क्रान्ति के क्षेत्र में घुस रही है तो आने वाली पीढ़ी इतिहास को न भूले सो हमने बतौर ए म्यूजियम मुरैना का विकास उल्ट कर पिछली सदियों की ओर मोड़ दिया है !

भईया जब आगे बढ़ जाओ और पुराने जमाने की झलक देखना हो तो जाना मुरैना ! इस सदियो पुराने शहर को हम रोजाना फुट और मीटरों पीछे धकेल कर संरक्षित करते जा रहे हैं !

हम आपको शहर में जंगल की सैर करायेंगें, जहाँ विकट बड़े बड़े मच्छर भी मिलेंगें, जंगल का घनघोर घुप्प अन्धकार भी और जानवरों जैसे ना समझने वाले और ना सुनने वाले स्वेच्छाचारी अफसर भी हमारे इस अजायबघर में मिलेंगे !

गीदड़ भभकी देकर गुर्राने वाले अफसरों के चमचे भी हम दिखायेंगें और अठारहवीं सदी की रिश्वतखोरी भी सरे आम चौराहों पर दिखायेंगे ! हम आपको यहाँ जंगल में व्याप्त गली गी गंदगी भी दिखा देंगे और सड़कों से बहकर घरों में घुसता नाले का सीवर भी दिखायेंगे ! छोटे छोटे प्रमाणपत्रों और आवेदन के लिये मशक्कत करते गरीब बेरोजगारों और लाचारों की फौज के साथ कर्मचारीयों को रिश्वत अधिकारपूर्वक मांगते 'धर जा या मर जा' तर्ज पर वसूलते दिखायेंगे ! आ जाओ प्यारे गर्मीयों की छुटिटयों का आनन्द जरा भारत के इस टूरिस्ट प्लेस में भी ले जाओ!                            

 

सामान्य सभा की बैठक आज

सामान्य सभा की बैठक आज

 

मुरैना 29 मई 07- जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक 30 मई को नेहरू पार्क रोड स्थित सभागार में आयोजित की गई है । सर्व संबंधितों को उपस्थिति के लिए आग्रह किया गया है । उपरान्त इसी दिन सामान्य प्रशासन समिति तथा शिक्षा स्थाई समिति का आयोजन भी उक्त सभागार में किया जायेगा ।

 

तीन शिक्षक निलम्वित

तीन शिक्षक निलम्वित

 

मुरैना 29 मई07- जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सभाजीत यादव ने सर्वशिक्षा अभियान के अन्तर्गत निर्माण कार्य समय सीमा में पूर्ण नहीं करवानें तथा कार्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता के कारण तीन शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलम्वित कर दिया है । शासकीय प्राथमिक विद्यालय डाव का पुरा के प्रधान अध्यापक एवं पी टी ए सचिव श्री राजेन्द्र सिंह तोमर, शासकीय प्राथमिक विद्यालय कन्या भर्रा में सहायक शिक्षक एवं पी टी ए सचिव श्री गोविन्द्र शरण शर्मा तथा शासकीय प्राथमिक विद्यालय बालक गुजरना में सहायक शिक्षक एवं पी टी ए सचिव श्री रामोतार शर्मा को निलम्वित कर मुख्यालय विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहाडगढ रखा गया है । संबंधित शिक्षकों द्वारा न तो कार्य में रूचि ली गई और न ही नोटिस के जबाव दिये । निलम्वन काल में निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी

 

प्रशिक्षण आज

प्रशिक्षण आज